छत्तीसगढ़

शिक्षा विभाग की सख्ती, दुर्ग संभाग के संयुक्त संचालक हेमंत उपाध्याय निलंबित

Shantanu Roy
12 Sept 2025 10:15 PM IST
शिक्षा विभाग की सख्ती, दुर्ग संभाग के संयुक्त संचालक हेमंत उपाध्याय निलंबित
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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों के अनुशासन और कार्य दक्षता को लेकर शिक्षा विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई की है। शिक्षा संभाग दुर्ग के प्रभारी संयुक्त संचालक हेमंत उपाध्याय को काम में लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग ने आज आधिकारिक आदेश जारी किया है। हेमंत उपाध्याय पर आरोप है कि सरगुजा में संयुक्त संचालक के पद पर कार्यरत रहते हुए उन्होंने गंभीर अनियमितताएँ कीं, स्वेच्छाचारिता दिखाई और सरकारी सेवा आचरण का
उल्लंघन
किया। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने प्रारंभिक जांच कराई, जिसमें आरोप सही पाए गए। जांच रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा विभाग ने उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के उल्लंघन का दोषी पाया।
निलंबन आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि हेमंत उपाध्याय को तत्काल प्रभाव से लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) में अटैच किया जा रहा है। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार भत्ता मिलेगा। विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि उनके स्थान पर आरएक ठाकुर, जो वर्तमान में उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय के पद पर कार्यरत हैं, को संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग दुर्ग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। शिक्षा विभाग का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे नियमों का पालन करें, कार्य के प्रति जिम्मेदारी निभाएँ और सार्वजनिक सेवा में पारदर्शिता बनाए रखें। हेमंत उपाध्याय के खिलाफ यह कार्रवाई सरकार की सख्ती और प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अनुशासनहीनता, स्वेच्छाचारिता और काम में लापरवाही से न केवल सरकारी तंत्र पर असर पड़ता है, बल्कि आम जनता की शिक्षा सेवाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई आवश्यक है ताकि प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। इस कार्रवाई को शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदारी तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। विभाग ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि सेवा नियमों का पालन सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार की कार्रवाई से सरकारी सेवाओं में सकारात्मक बदलाव आएगा और भ्रष्टाचार व अनुशासनहीनता पर अंकुश लगेगा। साथ ही, यह आदेश अन्य विभागों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है कि सेवा नियमों का उल्लंघन करने वालों को कोई छूट नहीं दी जाएगी। अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग की आगे की कार्रवाइयों पर टिकी हैं। यह देखा जाना है कि निलंबन अवधि में उपाध्याय के खिलाफ क्या आगे की जांच की जाएगी और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन ने कहा है कि शिक्षा सेवाओं को प्रभावी और सुचारु बनाने के लिए कठोर अनुशासन लागू किया जाएगा।
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